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भूपेश सरकार का नया तोहफा, बिजली हुई सस्ती, विद्युत नियामक आयोग ने घोषित की नई दरें

भूपेश सरकार का नया तोहफा, बिजली हुई सस्ती, विद्युत नियामक आयोग ने घोषित की नई दरें

रायपुर. राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की नई दरें घोषित कर दी है। इस कड़ी में हर श्रेणी के उपभोक्ताओं को राहत दी गई है। घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में न्यूनतम 10 फीसदी की कमी की गई है। कृषि उपभोक्ताओं की बिजली की दरों में 10 फीसदी तक की कमी की गई है। 


राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डीएस मिश्रा ने गुरूवार को प्रेस कांफ्रेंस में वर्ष 2019-20 के लिए विद्युत की नई दरें घोषित की है। उन्होंने कहा कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा वार्षिक राजस्व जरूरत 15 हजार 455 करोड़ से घटाकर 13 हजार 295 करोड़ मान्य किया गया है। 100 यूनिट प्रतिमाह की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के प्रति यूनिट दर 3.76 रूपए से घटाकर 3.40 रूपए की गई है। इसी तरह 100 से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं की प्रति यूनिट दर 3.80 रूपए से घटाकर 3.60 रूपए की गई है। विद्युत दरों में की गई कमी का लाभ करीब 91 फीसदी प्रतिशत घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा। 


कृषि पंपों के लिए बिजली की दरों में 30 पैसे प्रति यूनिट की कमी की गई है। प्रचलित दर 4.70 रूपए से घटाकर 4.40 रूपए प्रति यूनिट की गई है। कृषि सिंचाई पंप कनेक्शन पर वर्तमान में प्रभावशील पॉवर फैक्टर अधिभार को खत्म कर दिया गया है, जिससे किसानों को विशेष राहत मिलेगी। किसान 40 वॉट के स्थान पर अपने खेतों की रखवाली के लिए अधिकतम 100 वॉट तक के भार स्वीकृत किए गए हैं। 


कृषि एलाईड उपभोक्ताओं की बिजली की दरों में 10 फीसदी की कमी की गई है। 25 एचपी तक के कृषि अधारित उद्योग की विद्युत दर 13 फीसदी की कमी की गई है। 


इस श्रेणी के उपभोक्ताओं का सिंगल फेज एवं थ्री फेज कनेक्शन के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। अनुबंधित विद्युत भार प्रथा के स्थान पर मांग आधारित विद्युत दरें लागू की गई है। इन उपभोक्ताओं को स्थाई प्रभार और ऊर्जा प्रभार को युक्तियुक्त संगत करते हुए 0 से 100 यूनिट तक की खपत करने वाले 1 किलोवॉट भार वाले छोटे उपभोक्ताओं के लिए विद्युत दर 6.35 रूपए से घटाकर 5.90 रूपए प्रति यूनिट किया गया है। 


लघु उद्योग इकाईयों के विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए कनेक्टेड लोड की सीमा जो 15 हॉर्स पॉवर है को बढ़ाकर 25 हॉर्स पॉवर किया गया है। इन दाब उद्योगों के विद्यमान क्षमता को वृद्धि कर सुगम बनाने के लिए प्रचलित टैरिफ डिजाइन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करते हुए निचले स्लैब के साथ एकीकृत किया गया है। इसी तरह स्थाई प्रभार को 300 रूपए से घटाकर 110 रूपए प्रति किलोवॉट किया गया है। 



उच्चदाब स्टील उपभोक्ता श्रेणी की अपेक्षाकृत लघु इकाईयों को दी जानी वाली लोड फेक्टर इनसेंटिव की सुविधा को उद्योगों की मांग पर युक्तियुक्त करण 65 फीसदी से 79 फीसदी की सीमा को घटाकर और 63 से 77 फीसदी करने का निर्णय लिया गया है। केवल रोलिंग मिलों  के लोड फेक्टर की प्रचलित अधिकरत सीमा 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी की गई है। उद्योगों की मांग पर विचारोपरांत लोड फेक्टर की गणना हेतु पॉवर ऑफ ऑवर्स को प्रतिमाह 30 घंटा निर्धारित किया गया है।