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प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति मे एंट्री : बनी काँग्रेस महासचिव

प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति मे एंट्री : बनी काँग्रेस महासचिव

प्रियंका भले राजनीति में जीरो नहीं लेकिन उन्हें अभी तक चुनावी राजनीति की कसौटी पर कसा नहीं गया है। लगातार लगते कयासों के बीच प्रियंका गांधी औपचारिक रूप से राजनीति में आ गयी हैं. आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें महासचिव बनाते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा है. वे फरवरी के पहले हफ्ते से अपना कार्यभार संभालेंगी. पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को महासचिव-प्रभारी (उत्तर प्रदेश-पश्चिम) बनाया गया है. वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो पहले की तरह कर्नाटक के प्रभारी की भूमिका निभाते रहेंगे.

संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे अशोक गहलोत के राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने के बाद वेणुगोपाल की नियुक्ति की गई है. उत्तर प्रदेश के लिए प्रभारी-महासचिव की भूमिका निभा रहे गुलाम नबी आजाद को अब हरियाणा की जिम्मेदारी दी गयी है. प्रियंका गांधी को भाजपा का गढ़ माने जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी देने को प्रियंका का सक्रिय राजनीति मे एंट्री  : बनी काँग्रेस की महासचिव कांग्रेस का बड़ा दांव कहा जा रहा है. जहां पार्टी कार्यकर्ता भी प्रियंका के राजनीति में आने को लेकर उत्साहित हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी उनसे काफी उम्मीदें हैं.

कांग्रेस वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाए जाने पर कहा है कि प्रियंका के आने का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा. प्रियंका के लिए सबसे बड़ा बोझ पति राबर्ट वाड्रा पर लगे जमीन घोटाले के आरोप हैं। उनके खिलाफ लगभग दो दर्जन मामलों में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। इन मामलों को लेकर प्रियंका के खिलाफ सियासी हमला हो सकता है।

प्रिंयका की शक्ल-सूरत दादी इंदिरा गांधी से मिलती है। दक्षिण भारत और यूपी के ग्रामीण अंचल के कुछ भागों में अभी भी कांग्रेस को इंदिरा गांधी की पार्टी माना जाता है। अमेठी और रायबरेली के बाहर उन्हें कम लोग जानते हैं इसलिए उन पर राजनीतिक और निजी प्रहार कम होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रियंका गांधी के चुनावी मैदान में उतरने के कयास कई सालों से लगाए जा रहे हैं. अब भी कहा जा रहा है कि वे कांग्रेस की परंपरागत रायबरेली सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. हालांकि अब तक इस बारे में पार्टी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गयी है.