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भाजपा सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाणपत्र निरस्त, होगी जिला प्रशासन की कानूनी कार्रवाई

भाजपा सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाणपत्र निरस्त, होगी जिला प्रशासन की कानूनी कार्रवाई

Lok Sabha Seat Madhya Pradesh- धुर्वे वर्ष 2009 में बैतूल लोकसभा क्षेत्र से पहली तथा 2014 में दूसरी पहली दफा निर्वाचित हुई हैं। जिला कलेक्टर तरुण पीथोड़े ने इस संबंध में विभाग से पत्र प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  इस मामले में गठित उच्चाधिकार छानबीन समिति की जांच के आधार पर आयुक्त दिपाली रस्तोगी द्वारा छह फरवरी को जारी आदेश में कहा गया है कि धुर्वे की जाति निर्विवाद रूप से बिसेन / पवार हैं और यह मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित नहीं है।  छानबीन समिति ने अपने आदेश में कहा है कि ज्योति धुर्वे की जाति गोंड नहीं है, वे बिसेन (पवार) हैं, जो आदिवासी जाति नहीं है। छानबीन समिति ने कहा कि धुर्वे की मां की जाति गोंड है, लेकिन उनके पिता महादेव बिसेन जाति से हैं। ऐसे में पिता की जाति को ही उनकी जाति माना जाएगा।

विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसराणी के मुताबिक अभी ज्योति धुर्वे के पास छानबीन समिति के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का विकल्प खुला है। यदि हाईकोर्ट से वे स्टे ले लेती हैं तो उनकी संसद सदस्यता खतरे में नहीं पड़ेगी। हाईकोर्ट में पहले से ही इस मामले में केस चल रहा है। छानबीन समिति के फैसले पर चुनाव आयोग संज्ञान लेकर राष्ट्रपति से उनकी सदस्यता शून्य घोषित करने की सिफारिश कर सकता है। हालांकि ऐसा होने पर भी बैतूल लोकसभा सीट पर उपचुनाव नहीं होगा, क्योंकि दो महीने बाद ही लोकसभा चुनाव होने हैं।

छानबीन समिति ने अपने आदेश में कहा कि ज्योति धुर्वे ने अपनी मां की पहली शादी का तथ्य छानबीन समिति से छुपाया है। छानबीन समिति ने एक जांच दल बालाघाट भी भेजा था। वहीं छानबीन समिति ने कहा कि धुर्वे के पिता महादेव ने अपनी पहली शादी का तथ्य भी छुपाया है। धुर्वे के पिता महादेव गोंड जाति से संबंधित कोई प्रमाण पत्र नहीं दे पाए और न ही गोंड जाति की परंपराओं व प्रथाओं के बारे में नहीं बता पाए।