breaking news New

नेता प्रतिपक्ष बोले- आदिवासी महोत्सव हर्ष का विषय लेकिन धान के मुद्दे पर ध्यान दे सरकार, CM ने कसा तंज- 'आपको' जनता ने जवाब दे दिया है मैं और कुछ नहीं कहूंगा...

नेता प्रतिपक्ष बोले- आदिवासी महोत्सव हर्ष का विषय लेकिन धान के मुद्दे पर ध्यान दे सरकार, CM ने कसा तंज- 'आपको' जनता ने जवाब दे दिया है मैं और कुछ नहीं कहूंगा...

रायपुर. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव हर्ष का विषय है. नृत्य से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है. इस महोत्सव के लिए मैं बधाई देता हूँ. देश ही नही विदेश में भी आदिवासी संस्कृति में एकरूपता दिखाई देती है. आदिवासी संस्कृति गौरवशाली है. आदिवासी समाज प्रकृति से जुड़ा समाज है. धरमलाल कौशिक ने आदिवासियों को धान बेचने में आ रही कठिनाई से भी अवगत कराते हुए उनके निराकरण की दिशा में काम करने सरकार से आग्रह किया. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने उद्बोधन में धान खरीदी के संबंध में धरमलाल कौशिक के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने जवाब दे दिया है मैं इस पर और कुछ नहीं कहूंगा. सीएम ने आगे कहा कि नृत्य महोत्सव में 25 राज्य 3 केंद्र शासित प्रदेश और 6 देशों के अट्ठारह सौ कलाकार महोत्सव में हिस्सा ले रहे हैं मैं सभी का स्वागत करता हूं. महोत्सव की सफलता इसी से परिलक्षित हो रही है कि यहां दर्शकों ने अपना आशीर्वाद दिया है. इस ठिठुरती ठंड में भी दर्शक घर से निकलकर आदिवासी संस्कृति की झलक देखने पहुंच रहे हैं. राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में शामिल होने पर मुझे काफी प्रसन्नता हो रही है. सभी कलाकारों का स्वागत करती हूं. इस प्रकार के आयोजनों से एकता और भाईचारे की भावना बढ़ती है और एक दूसरे की संस्कृति से भी परिचित होते हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस भव्य आयोजन के लिए शुभकामनाएं देती हूं. हिंदुस्तान का आदिवासी समाज काफी मस्त मौला समाज है. समाज काफी सहजता के साथ अपनी जिंदगी जीता है. आदिवासी समाज प्रकृति के पुजारी हैं. यदि देश मे जंगल बचे हुए हैं तो इसका कारण आदिवासी समाज है. राज्यपाल ने नई पीढ़ी के आदिवासी युवाओं से आह्वान किया कि वे संस्कृति को सहेजकर भावी पीढ़ी को इससे अवगत कराने का कार्य करें, नहीं तो आदिवासी संस्कृति नृत्य और सभ्यता विलुप्त हो सकती है. इस प्रकार के आयोजन समय-समय पर होने चाहिए जिससे कि आदिवासी संस्कृति और सभ्यता से लोग परिचित होते हैं.