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राफेल मामला: CAG की रिपोर्ट संसद में पेश, कांग्रेस जेपीसी जांच पर अड़ी

राफेल मामला: CAG की रिपोर्ट संसद में पेश, कांग्रेस जेपीसी जांच पर अड़ी

नई दिल्ली मंगलवार को संसद की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस ने राफेल मुद्दे पर जमकर हंगामा मचाया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपीसी जांच की अपनी मांग दोहराई। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में कुछ बचा नहीं है, लिहाजा जेपीसी जांच कराने का कोई औचित्य नहीं बनता है। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में मंगलवार को राफेल डील पर CAG की रिपोर्ट पेश कर दी गई है। 

12 चैप्टर लंबी है कैग की रिपोर्ट 
इससे पहले राफेल डील में कथित घोटाले और गड़बड़ी के कांग्रेस पार्टी के आरोपों के बीच कैग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज दी थी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां राफेल डील को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। दरअसल, CAG अपनी रिपोर्ट की एक कॉपी राष्ट्रपति के पास और दूसरी कॉपी वित्त मंत्रालय के पास भेजते हैं। बताया गया है कि CAG ने राफेल पर 12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर विस्तृत जवाब और संबंधित रिपोर्ट CAG को सौंपी थी, जिसमें खरीद प्रक्रिया की अहम जानकारी के साथ 36 राफेल की कीमतें भी बताई गईं थीं। 

राफेल पर नियम बदले? टीम हेड का जवाब 
मीडिया रिपोर्ट में सोमवार को किए गए दावे के बीच भारतीय पक्ष की तरफ से राफेल वार्ता का नेतृत्व करने वाले एयर मार्शल SBP सिन्हा ने जवाब दिया है। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक पॉइंट को साबित करने के लिए कुछ नोट्स सिलेक्टिव तरीके से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि इनमें सच्चाई नहीं है। भारतीय टीम ने जो अपनी अंतिम रिपोर्ट दी है उस पर सभी 7 सदस्यों ने बिना किसी असहमति के हस्ताक्षर किए हैं।

सरकार से सरकार के बीच कॉन्ट्रैक्ट में ऐंटी-करप्शन क्लॉज पर एयर मार्शल सिन्हा ने कहा कि अब तक हमारा अमेरिका और रूस के साथ 'सरकार से सरकार के बीच' कॉन्ट्रैक्ट था। यह तीसरा 'सरकार से सरकार' कॉन्ट्रैक्ट है, जो फ्रांस के साथ हुआ। ऐसा क्लॉज इनमें से किसी के साथ नहीं था। 

कैग की यह रिपोर्ट काफी लंबी है, जिसे प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। मौजूदा 16वीं लोकसभा का वर्तमान सत्र बुधवार को समाप्त हो रहा है और यह इसका आखिरी सत्र है। अप्रैल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोकसभा का गठन होगा।