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Alha Udal : खेत में दबी विशालकाय तलवार आल्हा-ऊदल की!

Alha Udal : खेत में दबी विशालकाय तलवार आल्हा-ऊदल की!

ग्वालियर से जोगेंद्र सेन। Alha Udal बड़े लड़ैया, महोबे वाले खनक-खनक बाजी तलवार बड़े लड़ैया आल्हा-ऊदल जिनसे हार गईं तलवार.. बुंदेलखंड के वीर सपूतों आल्हा-ऊदल के अद्भुत साहस को ऐसी काव्य रचना में सुनाकर लोक गायक आज भी कवि सम्मेलनों को वीर रस में सराबोर कर देते हैं। इन्हीं आल्हा-ऊदल की निशानी कही जाने वाली विशाल तलवार ग्वालियर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूरी पर बेहट रोड पर बसे हस्तिनापुर के एक खेत में दबी है। क्षेत्र के लोगों के बीच यह किवदंती प्रचलित है कि यह तलवार बुंदेलखंड के वीर महोबा के आल्हा-ऊदल की है। जिनकी वीर गाथाएं आज भी बुंदेलखंड में हर जगह सुनने को मिल जाती हैं। आल्हा-ऊदल का ग्वालियर से नजदीकी रिश्ता होने के प्रमाण इतिहास में मिलता भी है। माना जाता है कि वीर सपूतों की मां देवल ग्वालियर के राजा दलपत की पुत्री थीं।

हस्तिनापुर के खेत में दबी उनकी तलवार को लेकर कई बातें प्रचलित हैं, हालांकि इनका प्रमाणित इतिहास अप्राप्त है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी हस्तिनापुर के पास एक तलवार के खेत में दबे होने की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन यह किसकी है, इसका प्रामाणिक इतिहास होने से इंकार करते हैं। तलवार को न तो पुरातत्व विभाग ने संरक्षित करने का कोई प्रयास किया है और न ही इसकी प्रामाणिकता के लिए कोई खोजबीन की है।

ग्रामीणों ने तार फेंसिंग कर तलवार को रखा है सुरक्षित : उटीला से बेहट जाने वाले मार्ग पर हस्तिनापुर गांव बसा है। गांव से कुछ ही दूरी पर एक खेत में लोहे की तार फेंसिंग के बीच तलवार जमीन में दबी है। बाहर से इसके हत्था ही दिखाई देता है। इसका हत्था इतना मोटा है कि साधारण मनुष्य के हाथ में आना आसान नहीं है। तलवार को देखने के लिए यहां जो लोग आते हैं वे इसे घिसकर भी देखते हैं कि यह पत्थर की है, या फिर धातु की। घिसने पर तलवार धातु की ही लगती है।