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सांसद राहुल गांधी करेंगे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ, कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल करेंगे

सांसद राहुल गांधी करेंगे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ, कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल करेंगे

रायपुर| राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि लोकसभा सांसद श्री राहुल गांधी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल करेंगे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ 27 दिसम्बर को सवेरे 10 बजे साईंस कॉलेज मैदान में होगा। शुभारंभ अवसर पर लद्ाख, कर्नाटक, अरूणाचल प्रदेश, बेलारूस और छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुति दी जाएगी। इस महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष श्री गुलाम नबी आजाद, उप नेता श्री आनंद शर्मा, राज्यसभा सांसद श्री अहमद पटेल और श्री मोतीलाल वोरा, पूर्व सांसद श्री के.सी. वेणुगोपाल, श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुश्री मीरा कुमार, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत, सांसद श्री पी.एल. पुनिया, श्री बी.के. हरिप्रसाद, श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला, श्री चंदन यादव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री कांतिलाल भूरिया और श्री भक्त चरणदास के साथ ही प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद, विधायक सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव अब अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का रूप ले लिया है। तीन दिवसीय इस नृत्य महोत्सव में देश के 25 राज्य एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के साथ ही 6 देशों के लगभग 1350 से अधिक प्रतिभागी अपनी जनजातीय कला संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। इस महोत्सव में 39 जनजातीय प्रतिभागी दल 4 विभिन्न विधाओं में 43 से अधिक नृत्य शैलियों का प्रदर्शन करेंगे। संस्कृति विभाग द्वारा जारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार महोत्सव के प्रथम दिन 27 दिसम्बर को 11.45 बजे से विवाह एवं अन्य संस्कार, पारंपरिक त्यौहार एवं अनुष्ठान, फसल कटाई व कृषि तथा अन्य पारंपरिक विधाओं पर नृत्य प्रतियोगिताएं होंगी। असम के कलाकारों द्वारा बागरूंगा नृत्य प्रस्तुत की जाएगी। तेलंगाना के कलाकारों द्वारा कोया नृत्य, झारखण्ड के कलाकारों द्वारा छाऊ नृत्य, ओड़िसा के कलाकारों द्वारा सिंगारी नृत्य और गुजरात के कलाकरों द्वारा सिद्दी नृत्य प्रस्तुत की जाएगी। दोपहर 3 बजे से राजस्थान के कलाकरों द्वारा सहरिया स्वांग, जम्मू का गुजर नृत्य, हिमाचल प्रदेश का घुरई नृत्य, लद्दाख का लद्दाखी नृत्य, उत्तराखण्ड का झांझी नृत्य, केरल का तैयम नृत्य, महाराष्ट्र का तड़पा नृत्य, तेलंगाना का गुसाड़ी नृत्य, मध्यप्रदेश का भगोरिया नृत्य, अरूणाचल प्रदेश का रेह नृत्य, आंध्रप्रदेश का लम्बाड़ी नृत्य और उत्तरप्रदेश का गरद नृत्य का आयोजन होगा। रात्रि आठ से नौ बजे तक थाईलैण्ड, बांग्लादेश, बेलारूस, मालदीव एवं युगंाडा देशों से आमंत्रित कलाकारों द्वारा गैर प्रतियोगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। महोत्सव के दूसरे दिन 28 दिसम्बर को सवेरे नौ बजे से दोपहर 12.50 बजे तक गुजरात का वसावा नृत्य, आंध्रप्रदेश का ढिमसा नृत्य, त्रिपुरा का ममिता नृत्य, झारखण्ड का पायका नृत्य, तमिलनाडु का टोडा नृत्य, आरूणाचल प्रदेश का आदि नृत्य, राजस्थान का गवरी नृत्य, छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव का हुल्की नृत्य सहित असम और मध्यप्रदेश राज्य का नृत्य प्रस्तुत की जाएगी। दोपहर 12.50 बजे से 1.40 बजे तक श्रीलंका, थाईलैण्ड एवं मालदीव देशों से आमंत्रित कलाकारों द्वारा गैर प्रतियोगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक गुजरात के कलाकारों द्वारा राठवा नृत्य, हिमांचल प्रदेश का किन्नौरा नृत्य, पश्चिम बंगाल का संथाली नृत्य का आयोजन होगा। शाम 5 बजे से 7.30 बजे तक ओड़िसा का दुरवा नृत्य, बिहार का करमा नृत्य, अण्डमान निकोबार का निकोबारी नृत्य, तेलंगाना का माथुरी नृत्य, त्रिपुरा का होजागिरी नृत्य, उत्तराखण्ड का हारूल नृत्य, मणिपुर का थांगकुल नृत्य, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के कलाकारों द्वारा दंडामि माड़िया नृत्य प्रस्तुत की जाएगी। 7.30 बजे से 8.15 बजे तक अतिथियों के आगमन पर मंचीय कार्यक्रम होगा। रात्रि 8.15 बजे से 9 बजे तक बंाग्लादेश, युगांडा एवं बेलारूस देशों से आमंत्रित कलाकारों द्वारा गैर प्रतियोगी सांस्कृति कार्यक्रम प्रस्तुत की जाएगी। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के अंतिम दिन 29 दिसम्बर को उत्तराखण्ड के कलाकारों द्वारा लाष्पा नृत्य, जम्मू का बकरवाल नृत्य, मध्यप्रदेश का भड़म नृत्य, हिमाचल प्रदेश का गद्दी नृत्य, कर्नाटक और सिक्किम का नृत्य, झारखण्ड का दमकच नृत्य, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की दंडामी नृत्य प्रस्तुत की जाएगी। दोपहर 12.50 बजे से 1.40 बजे तक श्रीलंका, थाईलैड एवं मालदीव देशों से आमंत्रित कलाकारों द्वारा गैर प्रतियोगी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत की जाएंगी। दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक तेलंगाना, लद्दाख का नृत्य, उत्तरखण्ड का मुखौटा नृत्य, गुजरात और सिक्किम का नृत्य, केरल का मरायूराट्टम नृत्य, त्रिपुरा का संगराई नृत्य, मध्यप्रदेश का करमा नृत्य और छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव का गौर मार नृत्य का आयोजन होगा। शाम 6 बजे से 7 बजे तक बांग्लादेश, युगांडा एवं बेलारूस देशों के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत की जाएगी। शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक समापन समारोह, पुरस्कार वितरण और सम्मान का कार्यक्रम रखा गया है।