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किसान आंदोलन के समर्थन में केजरीवाल का एक दिन का उपवास ,जावड़ेकर ने बताया पाखंड

किसान आंदोलन के समर्थन में केजरीवाल का एक दिन का उपवास ,जावड़ेकर ने बताया पाखंड

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किसान आंदोलन के समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक दिन के उपवास को पाखंड बताया है।

जावड़ेकर ने सोमवार को ट्वीट कर कहा , “ केजरीवाल जी , ये आपका पाखंड है। आपने पंजाब विधानसभा चुनावों में वादा किया था कि जीतने पर कृषि उत्पाद बाज़ार समिति ( एपीएमसी) कानून में संशोधन किया जाएगा। नवम्बर 2020 में आपने दिल्ली में कृषि कानूनों को अधिसूचित भी किया और आज आप उपवास का ढोंग कर रहे हो। यह कुछ और नहीं बल्कि पाखंड ही है।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को लोगों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में एक दिन का अनशन करने की अपील की और कहा कि अंत में किसानों की जीत होगी।

केजरीवाल भी किसानों के समर्थन में सोमवार को एक दिन का अनशन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी किसान संघों के नेताओं ने कहा है कि वे सोमवार को एक दिन की भूख हड़ताल करेंगे और नए कृषि कानूनों की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिये सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करेंगे। मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी (आप) के स्वयंसेवकों, समर्थकों और देश के लोगों से किसानों के आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘ उपवास पवित्र होता है। आप जहां हैं, वहीं हमारे किसान भाइयों के लिए उपवास कीजिए। प्रभु से उनके संघर्ष की सफलता की प्रार्थना कीजिए। अंत में किसानों की अवश्य जीत होगी।’’


दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि वह भी पार्टी कार्यालय में पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ एक दिन का अनशन करेंगे।

सिसोदिया ने ट्वीट किया, ‘‘ देश का अन्नदाता किसान अपनी रोज़ी रोटी बचाने की ख़ातिर, केन्द्र सरकार के तीन क़ानूनों को वापस लिए जाने की मांग करते हुए आज अनशन पर है। किसानों की मांग के समर्थन में आज आम आदमी पार्टी कार्यालय में सभी साथियों के साथ मैं भी उपवास पर हूं।’’

सिसोदिया के अलावा गोपाल राय, सत्येंद्र जैन, आतिशी और राघव चड्डा सहित आप के कई मंत्री और विधायक पार्टी कार्यालय में किसानों के समर्थन में अनशन करेंगे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार जहां तीनों कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।

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