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Exclusive: ब्रिटेन से लौटे संक्रमित यात्रियों में आधे हो सकते हैं कोरोना के नए स्ट्रेन का शिकार

Exclusive: ब्रिटेन से लौटे संक्रमित यात्रियों में आधे हो सकते हैं कोरोना के नए स्ट्रेन का शिकार

ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन आने के बाद से नए सिरे से टेंशन बढ़ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन से भारत लौटे यात्रियों में से संक्रमित पाए गए लोगों में से आधे यात्रियों में कोरोना के नए स्ट्रेन होने की संभावना है. ब्रिटेन से भारत लौटे 20 यात्री कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. 

दरअसल, कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन जो कि ब्रिटेन में पाया गया है से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है. इसे लेकर अब भारत में भी अलर्ट है. क्योंकि ब्रिटेन से भारत आए 20 यात्री कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बहुत संभव है कि इन पॉजिटिव पाए गए यात्रियों में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन दाखिल हुए हों और इन लोगों के जरिए ब्रिटेन का नया वायरस भारत में भी दाखिल हो गया है.  अभी इंग्लैंड में संक्रमित लोगों में से 60 फीसदी लोग कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमित पाए गए हैं. 

इस मसले पर CCMB, हैदराबाद के डायरेक्टर डॉ राकेश मिश्रा ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में कहा कि "हम जानते हैं कि ब्रिटेन के यात्री जो कल भारत आए हैं, उनमें से 20 कोरोना पॉजिटिव गए हैं. वहीं, वर्तमान में नए कोरोना स्ट्रेन कि चपेट में ब्रिटेन के 60% कोविड संक्रमित लोग आ चुके हैं. ऐसे में यह बहुत संभव है कि भारत आए इन 20 में से, आधे लोग नए स्ट्रेन के शिकार हों."

हालांकि, एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि उन लोगों की टेस्टिंग की जरुरत नहीं है जो एक महीना पहले इंग्लैंड से वापस लौटे हैं. गौरतलब है कि इस नए कोरोना स्ट्रेन B.1.1.7 के चलते भारत समेत कई देशों ने ब्रिटेन के साथ अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है.  

डॉ राकेश मिश्रा ने आगे कहा कि, 'हमें उन लोगों को ट्रैक करने की आवश्यकता है जो कुछ हफ़्ते में ब्रिटेन से आए थे. साथ ही इस नए वायरस को फैलने से रोकने के लिए, उनके संपर्क में आए लोगों कि कड़ाई से निगरानी की जानी चाहिए. वैसे भी भारत में अमेरिका के बाद कोरोनोवायरस मामलों के सबसे ज्यादा केस हैं.' 

डॉ मिश्रा कहते हैं कि, "सभी वायरस म्यूटेट होते हैं, यह बहुत सामान्य बात है. इसके पीछे एक कारण यह भी है कि हमारे पास इसका कोई टीका नहीं होता. इन्फ्लूएंजा के खिलाफ कोई टीका लंबे समय तक काम नहीं कर पाता, क्योंकि इसका स्वरूप हर साल बदल जाता है और टीके अप्रभावी हो जाते हैं." उन्होंने कहा कि कारीब 70% संभावना है कि नया स्ट्रेन SARS-COV-2 की तुलना में अधिक घातक होगा. 

डॉ मिश्रा ने आगे कहा कि, 'अगर बड़ी संख्या में लोग नए वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, तो यह चिंता का विषय होगा, भले ही इसके लिए इलाज और सावधानियां समान रहें. क्योंकि, इससे अस्पतालों में भीड़भाड़ हो सकती है.' उन्होंने कहा कि हालांकि, हमे नए स्ट्रेन के बारे पहले पता चल गया है, इसलिए हमें सावधानी के साथ बचाव कि दिशा में तेजी से काम करना चाहिए. जांच के लिए रैपिड एंटीजन की जगह आरटी-पीसीआर टेस्ट पर फोकस करना चाहिए. 


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