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नागरिकता संशोधन बिल लागू होने से बांग्ला भाषी 40% तक पहुंच जाएंगे, असमिया भाषी 36% ही बचेंगे

 नागरिकता संशोधन बिल लागू होने से बांग्ला भाषी 40% तक पहुंच जाएंगे, असमिया भाषी 36% ही बचेंगे

गुवाहाटी. नॉर्थ-ईस्ट का एक बड़ा वर्ग इस बात से डरा हुआ है कि नागरिकता संशोधन बिल के पास हो जाने से शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी। इससे उनकी पहचान, भाषा और संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी। खासकर असम के लोगों का कहना है कि अगर बिल लागू हो जाता है तो अपने ही प्रदेश में असमिया भाषी अल्पसंख्यक हो जाएंगे। दरअसल, असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट से जिन 19 लाख लोगों को बाहर किया गया है, उनमें करीब 12 लाख हिंदू बंगाली बताए जा रहे हैं।
 

भरोसा: सरकार कभी असमिया जाति को नुकसान नहीं पहुंचाएगी
असम के सीएम सर्वानंद सोनोवाल ने लोगों को सुरक्षा का यकीन दिलाते हुए कहा कि हमारी सरकार ने कभी असमिया जाति को नुकसान नहीं पहुंचाया है और न ही कभी पहुंचाएगी। हम असमिया भाषी लोगों की सुरक्षा के लिए शुरू से काम कर रहे हैं। आप लोग आंदोलन से असम का भविष्य नहीं बदल सकते। सोनोवाल ने कहा कि कुछ लोग भ्रम फैलाकर राज्य में अराजक स्थिति पैदा करना चाहते हैं। बिल से लोगों को परेशानी नहीं होगी। उनकी सुरक्षा के लिए असम समझौते की धारा-6 को कारगर बना रहे हैं।

हकीकत: असमिया भाषी अकेले बहुसंख्यक, 12% कम हो सकते हैं  
असम में बांग्लादेश से आकर बसे बंगाली हिंदू-मुसलमान पहले बंगाली ही लिखते थे, पर बाद में उन्होंने असमिया को अपनी भाषा के तौर पर स्वीकार कर लिया। धीरे-धीरे लिखने पढ़ने भी लगे। राज्य में असमिया बोलने वाले 48% लोग हैं। बंगाली बोलने वाले यदि असमिया छोड़ देते हैं, तो असमिया भाषी 36% ही बचेंगे। जबकि असम में बांग्ला भाषी 28% है। नागरिकता बिल लागू होने से बांग्ला भाषी 40% तक पहुंच जाएंगे। अभी असमिया यहां एकमात्र बहुसंख्यक भाषा है।

राजनीति: 2021 के चुनाव से पहले हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर फोकस
जानकारों का कहना है कि नागरिकता बिल लागू होने से असम में धार्मिक आधार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण भी होगा। स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों की अहमियत घटेगी। भाजपा और संघ हिंदू राजनीति को आगे कर रहे हैं। इसी एजेंडे से  2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में पहली बार सरकार बनाई। 126 में से 60 सीटें जीतीं। उसकी सहयोगी असम गण परिषद ने 14 सीटें जीती हैं। जबकि इससे पहले के चुनाव में भाजपा को राज्य में महज 5 सीटें मिली थीं। अगला चुनाव 2021 में होना है।

रविशंकर ने श्रीलंकाई तमिलों को नागरिकता देने की मांग उठाई

आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने देश में रह रहे तमिलों का समर्थन किया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह देश में 35 साल से शरणार्थियों की तरह रह रहे एक लाख से भी ज्यादा श्रीलंकाई तमिलों को नागरिकता देने पर विचार करे।