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सन्दीप कटरिया: छत्तीसगढ़ बन रहा भाजपा के परप्रान्तीय पितामहों का गढ़ और कैसे हमारे पुरखों की पहचान खत्म की जा रही है .

सन्दीप कटरिया: छत्तीसगढ़ बन रहा भाजपा के परप्रान्तीय पितामहों का गढ़  और कैसे हमारे पुरखों की पहचान खत्म की जा रही है .

हमारे पुरखों ने एक सपना देखा था पृथक राज्य छत्तीसगढ़ का. यह सपना पुरा भी हुआ है सन् 2000में. लेकिन इसके बाद पुरखों के सपने वाले छत्तीसगढ़ को भाजपा के पितामहो के 'गढ़' बदलने की कोशिशे शुरू हो गई. बीते 15 साल में छत्तीसगढ़ के पुरखों की पहचान को बदलने, उनके नाम को नवपिढी की स्मृतियों तक से मिटाने उनके निशानियों को खत्म करने की साजिश शुरू हो गई. यह बताया और दिखाया जा रहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य बनने से पहले था ही नहीं. और इसका निर्माण अटल बिहारी वाजपेयी ने किया है. हद तो यह हो गई है कि नामकरण के इस खेल में भाजपा के पितामह दीनदयाल को छत्तीसगढ़ कि पितामह के तौर बताने की कोशिश की जा रही है. उनकी तस्वीर को सरकारी बना दी गई है. यही नहीं छत्तीसगढ़ में दीनदयाल और श्यामाप्रसाद मुखर्जी इस तरह यहां के स्थान, भवन और शिक्षा में प्रचारित किए जा रहे हैं जैसे यही राज्य आंदोलनकारी रहे हो. यही माटीपुत्र रहे हो


हुआ क्या है ये जानिए-

  • छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम स्प्नदृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल आपको राज्य के विभिन्न जिलों में कहीं नहीं दिखेंगे, न उनके नाम पर किसी बड़े संस्थान का नाम और नहीं कोई पहचान. 
  • गोड़ राजाओं की देन आस्था का प्रतीक सरोवर बूढ़ातालाब को बदलकर विवेकानंद सरोवर करना
  • माना एयरपोर्ट को छत्तीसगढ़ के महापुरुषों के नाम छोड़ स्वामी विवेकानंद जी के नाम पर करना
  • नया रायपुर का नाम अटल नगर
  • बिलासपुर विश्वविद्यालय का नाम अटल विश्वविद्यालय
  • राज्योत्सव स्थल का नाम श्याम प्रसाद मुखर्जी परिसर
  • साइंस कॉलेज स्थित सभागार- पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार
  • जगदलपुर मेडिकल कॉलेज-  बलीराम कश्यप के नाम पर
  • सरकारी दस्तावेज- पं. दीनदयाल उपाध्याय(तस्वीर के साथ)
  • इसके साथ ही प्रदेश भर में अटल चौक, अटल भवन, अटल स्मारक
  • यही नहीं बिलासपुर स्थित सभागार- लखीराम अग्रवाल सभागार
  • शहीद वीरनारायण के जन्म स्थली सोनाखान को बेच ही दिए हैं
  • इन सबके अलावा विभिन्न चौक, चौराहों, मार्ग भी छत्तीसगढ़ के पुरखो के नाम नहीं है
  • न ही आपको कोई बड़ी प्रतिमा प्रदेश के शहीदों और आंदोलनकारियों की कहीं दिखाई देगी,  जैसे- शहीद वीरनारायण सिंह के नाम पर क्या है- एक क्रिकेट स्टेडियम जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं था ?

हमारा प्रश्न :

  • शहीद गैंद सिंह के नाम पर क्या है ?
  • शहीद गुण्डाधूर के नाम पर क्या है ? 
  • महान राजा महराजा प्रवीरचंद भंजदेव के नाम पर क्या है ?
  • राज्य के स्वप्नदृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल के नाम पर क्या है- राज्य अलंकरण को देने को छोड़कर  ?
  • पं. सुदंरलाल शर्मा के नाम पर क्या है- राज्य अलंकरण पुरुस्कार तथा ओपन यूनिवर्सिटी को छोड़कर
  • गुरु घासीदास बाबा के नाम पर क्या है- विश्वविद्याल, घड़ी चौक, अलंकरण को छोड़कर ?
  • ठा. प्यारेलाल, हरि ठाकुर, प्यारेलाल गुप्त, बैरिस्टर छेदीलाल, दाऊ रामचंद्र देशमुख, दाऊ मंदराजी, हबीब तनवीर के नाम पर क्या विशेष है ?
  • छत्तीसगढ़ के महारुपषों को राज्य बनने के बाद कितना सम्मान मिला ?


हमारे अनेको अनेक ऐसे माटीपुत्र हैं जिनका नाम इस राज्य के चप्पे चप्पे पर अंकित होना चाहिए था लेकिन इन 15 वर्षो में आज भाजपा के सुनियोजित षड्यंत्र के तहत सभी गुमनामी में धकेले जा चुके हैं , भाजपा को भगाना अपनी माटी के सुगन्ध को स्थापित करने छग के आत्मसम्मान छग के स्वाभिमान छग की पहचान को बचाने आज बहुत जरूरी हो गया है,

हमारे लोगो को सामने कर हमारा वोट लेकर हमारे पुरखों के पदचिन्हों को मिटाने वाली भाजपा को पूरे राज्य में हर जगह सबक सिखाएं इसी में छत्तीसगढ़ियों का हित है, स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार 

छत्तीसगढ़ियों के लिए आज भी दिवास्वप्न है इस पर चर्चा शेष है 



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