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संपादकीय : योजनाओं का असर

संपादकीय : योजनाओं का असर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर अटल भूजल योजना की शुरुआत कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और उपयोगी योजना की नींव रखी। छह हजार करोड़ रुपए वाली इस योजना का उद्देश्य भूजल स्तर को उठाना और जल संकट से निपटना है। यह योजना देश के उन सात राज्यों पर केंद्रित है, जहां भूमिगत जल का स्तर नीचे जा रहा है। लेकिन यह ध्यान रहे कि ऐसा अन्य राज्यों में भी हो रहा है। यह वक्त की मांग है कि अन्य राज्य अपने स्तर पर भूमिगत जल के गिरते स्तर की चिंता करें। जल को संरक्षित करने का काम केवल केंद्र सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जल संरक्षण के मामले में मोदी सरकार ने अपनी गंभीरता का परिचय तभी दे दिया था, जब दोबारा सत्ता में आने के बाद जल संसाधन और पेयजल मंत्रालय को मिलाकर जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया था। ऐसा करके उसने जल जीवन अभियान के तहत हर घर को नल से जल पहुंचाने की योजना पर भी काम शुरू किया। यह भी एक महत्वाकांक्षी योजना है। वास्तव में ऐसी योजनाओं के जरिये ही भावी जल संकट से निपटा जा सकता है। यह उम्मीद करनी चाहिए कि मोदी सरकार जल संबंधी जिन भी योजनाओं पर आगे बढ़ रही है, उन्हें वैसी ही सफलता मिले जैसी विकास एवं जनकल्याण संबंधी अन्य योजनाओं को मिली है।

इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में शुरू की गई रसोई गैस, आवास, बिजली, शौचालय, स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। इन योजनाओं की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण मोदी सरकार की शानदार वापसी से मिलता है। अपनी विकास एवं जनकल्याण संबंधी योजनाओं के अमल में कहीं अधिक सक्षम होने के बाद भी मोदी सरकार को इस पर विचार करने की जरूरत है कि उसके राजनीतिक विरोधी जब-तब ऐसा माहौल तैयार करने में क्यों सफल हो जा रहे हैं कि इस सरकार को जनता के हितों की परवाह नहीं और वह तो अपने किसी गुप्त एजेंडे पर काम कर रही है? इस सवाल पर विचार करने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि हाल में नागरिकता कानून पर सुनियोजित दुष्प्रचार के तहत एक ऐसा माहौल खड़ा कर दिया गया जैसे सरकार ने कोई जनविरोधी और संविधान विरोधी काम कर दिया है। मोदी सरकार और साथ ही भाजपा को इस पर ध्यान देना ही होगा कि झूठ का इतना बड़ा पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? सरकारी तंत्र और साथ ही भारतीय जनता पार्टी के तमाम सांसद एवं विधायक समय रहते इस झूठ की काट क्यों नहीं कर सके? सरकार को चाहिए कि वह अपने प्रति जनता के भरोसे की डोर को और मजबूत करे।