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पीएम मोदी 12 को बनारस टर्मिनल देश को करेंगे समर्पित

पीएम मोदी 12 को बनारस टर्मिनल देश को करेंगे समर्पित

बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले आम बजट में बनारस को मिली सौगात अब गंगा की लहरों पर दिखेगी। पूरे चार साल बाद अब देश के पहले इनलैंड वॉटर हाइवे-वन (वाराणसी-हल्दिया) में 365 दिन बड़े मालवाहक जहाज चलेंगे। 175 करोड़ की लागत से बनारस के रामनगर में बने मल्‍टी मॉडल टर्मिनल को प्रधानमंत्री 12 नवम्‍बर को देश को समर्पित करेंगे।


हाइलाइट्स

  • देश के पहले इनलैंड वॉटर हाइवे-वन (वाराणसी-हल्दिया) में 365 दिन बड़े मालवाहक जहाज चलेंगे।
  • 175 करोड़ की लागत से बने मल्‍टी मॉडल टर्मिनल को प्रधानमंत्री 12 नवम्‍बर को देश को समर्पित करेंगे। 
  • मालवाहक ‘टैगोर’ 8 या 9 नवम्‍बर को वाराणसी पहुंच रामनगर में नवनिर्मित टर्मिनल पर लंगर डालेगा।
  • वाराणसी से हल्दिया तक बड़े जहाजों को चलाने के लिए 45 मीटर चौड़ा गंगा चैनल तैयार किया जाएगा। 


बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले आम बजट में बनारस को मिली सौगात अब गंगा की लहरों पर दिखेगी। पूरे चार साल बाद अब देश के पहले इनलैंड वॉटर हाइवे-वन (वाराणसी-हल्दिया) में 365 दिन बड़े मालवाहक जहाज चलेंगे। 175 करोड़ की लागत से बनारस के रामनगर में बने मल्‍टी मॉडल टर्मिनल को प्रधानमंत्री 12 नवम्‍बर को देश को समर्पित करेंगे। यह जानकारी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने शनिवार को ट्वीट कर दी। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे की युद्धस्‍तर पर तैयारी शुरू हो गई है। इस दौरे में प्रधानमंत्री गंगा वॉटर ट्रांसर्पोटेशन के सबसे खास बनारस टर्मिनल के शुभारंभ के अलावा 500 करोड़ से रेकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुए बा‍बतपुर हाइवे और रिंग रोड का लोकार्पण करेंगे। इस मौके पर कोलकाता से पेप्सिको के उत्‍पादों से संबंधित 16 कंटनेरों को लेकर चले मालवाहक जहाज एमवी आरएन टैगोर को टर्मिनल पर रिसीव भी करेंगे। मालवाहक ‘टैगोर’ 8 या 9 नवम्‍बर को वाराणसी पहुंच रामनगर में नवनिर्मित टर्मिनल पर लंगर डालेगा। 


इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया(आईडब्‍ल्‍यूएआई) के चेयरमैन प्रवीण कुमार के मुताबिक वॉटर हाइवे-वन के प्रमुख बनारस टर्मिनल के शुभारंभ के साथ गंगा परिवहन के जरिए कारोबार और पर्यटन के नए युग की शुरुआत होगी। आने वाले दिनों में यह जलमार्ग बंगाल की खाड़ी से सटे दूसरे देशों के साथ कारोबारी दोस्‍ती की नई डोर बनेगा।


32 साल बाद चालू होगा हाइवे 

देश का पहला 1620 किलोमीटर लंबा बनारस-हल्दिया इनलैंड वॉटर हाइवे अक्‍टूबर 1986 में घोषित जरूर हुआ पर चालू नहीं हो सका था। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद पहले आम बजट में वाराणसी-हल्दिया जल परिवहन शुरू करने की घोषणा हुई थी। विश्‍व बैंक की मदद से करीब 5200 करोड़ रुपये खर्च वॉटर हाइवे को चालू करने पर काम शुरू होने के बाद अगस्‍त 2016 में ट्रायल रन में दो मालवाहक जहाजों से मारूति कारें और बिल्डिंग मटीरियल की खेप भेजी गई थी। टर्मिनल बन जाने से अब 365 दिन और चौबीसों घंटे मालवाहक जहाज चलेंगे। इस टर्मिनल से करीब 20 हजार लोगों को रोजी मिलेगी। 


विकास का दरवाजा खुलेगा 

बनारस-हल्दिया जलमार्ग और उसके प्रमुख केंद्र बनारस टर्मिनल को इस तरह तैयार किया गया है जिससे यूपी समेत अन्‍य कई राज्‍यों की इंडस्‍ट्री की सभी जरूरतें पूरी होंगी।‘यूपी विकास यात्रा’ में जहां कहीं भी कल कारखाने लगाने या दूसरे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डिवेलप करने को हैवी मशीनरी से लेकर रॉ-मटीरियल तक नए विकल्‍प के तौर पर उभरे वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग के जरिए कम समय, कम भाड़े और एक साथ बड़े पैमाने पर पहुंच सकेगा। इससे आयात और निर्यात के नए रास्‍ते भी खुलेंगे। बनारस टर्मिनल डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर व रोड हाइवे का मेन जंक्‍शन होने और फ्रेट विलेज बनने से इंडस्‍ट्री के लिए वेयर हाउस, कोल्‍ड स्‍टोरेज, पैकेजिंग-रैपिंग, कारगो स्‍टोरेज, रोड ट्रांसपोर्ट सर्विस सुविधा उपलब्‍ध होगी। 


बैगन से लेकर मलाई गिलोरी तक जाएगी 

बनारस से चलने वाले मालवाहक पोत से एसी कंटेनरों के जरिए बाकी सामान के साथ बंग भाषियों के मनपसंद बैगुन भाजा के लिए खास पूर्वांचल का गोल बैगन, तीखी हरी मिर्च, बनारस का फेमस पान, मलाई गिलौरी और तमाम चीजें एकदम फ्रेश पश्चिम बंगाल के बाजारों तक पहुंचेगी। वहां की खास मिठाई संदेश, छेना पायस, लाल दही संग देशी-विदेशी तमाम वरायटी की मछलियों का बनारसियों को घर बैठ स्‍वाद चखने का मौका मिलेगा। 


गंगा चैनल बनेगा 

वाराणसी से हल्दिया तक 1500 से 2000 मीट्रिक टन क्षमता वाले जहाजों को चलाने के लिए कैपिटल ड्रेजिंग के जरिए 45 मीटर चौड़ा गंगा चैनल तैयार किया जाएगा। इसमें हर मौसम में 2.50 से 3 मीटर तक अश्‍योर्ड डेप्थ होगी। जहाज रास्‍ता न भूले इसके लिए चैनल मार्किंग होगी। भारी क्षमता वाले जहाजों के माल की ढुलाई होने पर ट्रेन और सड़क मार्ग की तुलना में भाड़े में तीन गुने की कमी आएगी।