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Indore Literature Festival 2019 : सही नहीं है देश की महान हस्तियों को 'कंट्रोवर्शियल फिगर' बनाने की कोशिश

Indore Literature Festival 2019 : सही नहीं है देश की महान हस्तियों को 'कंट्रोवर्शियल फिगर' बनाने की कोशिश

इंदौर। Indore Literature Festival 2019 नईदुनिया के सहयोग से हैलो हिंदुस्तान द्वारा आयोजित किए जा रहे तीन दिनी 'इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल' का आगाज शनिवार सुबह होटल मैरियट में हुआ। पहले दिन देश भर के विद्वान विचारकों और साहित्यकारों ने कई विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस वैचारिक समुद्र मंथन के जरिए उस सत्य-अमृत तलाश की गई, जिसे लेकर कई बार स्थिति वाद-विवाद से बढ़कर अराजकता तक पहुंच जाती है। यूं तो दिन भर में कई सत्र हुए, मगर सत्य की तलाश के लिहाज से नईदुनिया द्वारा प्रस्तुत दक्षिण भारत के मशहूर लेखक डॉ. विक्रम संपत का सत्र सबसे प्रभावी रहा। उन्होंने इन दिनों भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु बने वीर सावरकर के कई जानेअनजाने पहलुओं पर खुलकर बात की।

माफी नहीं मांगी वीर सावरकर ने

डॉ. दिव्या गुप्ता और नवीन खंडेलवाल ने इस सत्र का संचालन किया। उनके सवालों का साफगोई से जवाब देते हुए डॉ. संपत ने कहा कि सावरकर पर सवाल वो लोग उठाते हैं, जिन्हें ऐतिहासिक तथ्यों और उस समय के नियम-कायदों की पूरी जानकारी नहीं है। मसलन, उन पर सबसे बड़ा इलजाम ये लगाया जाता है कि सावरकर ने अंग्रेज सरकार से क्षमा याचना करते हुए पत्र लिखा था, जबकि उन्होंने राजनीतिक बंदियों को छोड़ने के लिए एक पिटीशन दायर की थी। ये एक सामान्य प्रक्रिया है। यहां तक कि गांधीजी ने खुद सावरकर की रिहाई के लिए एक पिटीशन दायर की थी। इस मामले में राजनेता सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए झूठ और भ्रम फैला रहे हैं।

सावरकर बनाम गांधी

हमें साबरमती के संत महात्मा गांधी के बारे में तो बताया गया, लेकिन 11 साल अंग्रेजों के काले कानूनों के चलते काला पानी की भीषण यातना भुगतने वाले वीर सावरकर समेत देश के कई सच्चे सपूतों के बारे में बताया ही नहीं गया। आज भी इन महान हस्तियों को 'कंट्रोवर्शियल फिगर' बनाने की कोशिश की जाती है। दरअसल, वैचारिक स्तर पर सावरकर और गांधी दो ऐसी भिन्न् धाराएं हैं, जिनका मिलना संभव ही नहीं है। इसके बावजूद गांधी सावरकर से तीन बार मिले।