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Chhattisgarh : नक्सली वारदातों में कमी, लेकिन मोर्चे पर तैनात जवानों बढ़ा रहा असवाद

Chhattisgarh : नक्सली वारदातों में कमी, लेकिन मोर्चे पर तैनात जवानों बढ़ा रहा असवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2019 में नक्सली वारदात में कमी आई है। लेकिन जवान अवसाद और अन्य कारणों से खुद को ही गोली मार रहे हैं। पिछले दो महीने में ऐसी तीन घटनाएं हुई हैं, जिसमें नौ जवानों की जान गई है। इनमें दो घटनाएं साथियों को गोली मारने की है तो एक खुद को। नारायणपुर जिले में आइटीबीपी के जवान ने अपने ही पांच साथियों को गोलियों से भून दिया और खुद को भी गोली मार ली। वहीं, चुनाव ड्यूटी में रांची (झारखंड) गए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के एक जवान ने अपने अफसर को गोली मार दी।

घटना में जवान की भी गोली लगने से मौत हो गई। इधर, दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के जवान ने खुद को गोली मार ली। जून 2019 में बीजापुर में सीएएफ के एक आरक्षक ने अपने ही दो साथियों को गोली मार दी। दोनों ही आरक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई। नक्सल मोर्चे पर अवसाद जवानों के लिए काल बन रहा है।

जवानों की खुदकशी के पीछे मुख्य रूप से तीन वजह बताई जा रही हैं। इनमें घर- परिवार से दूरी और तैनाती क्षेत्रों के कठिन हालात शामिल हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार खुदकशी की यह वजह हो सकती है, लेकिन दूसरे की हत्या करना, यह सामान्य स्थिति में कोई नहीं करता।

नक्सल ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाल चुके राज्य पुलिस के एक आला अफसर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों और उनके कमांडिंग अफसरों को संयम बरतने की सलाह देते हैं। इस वरिष्ठ आइपीएस अफसर ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के पीछे काम से ज्यादा पारिवारिक कारण होता है।


फोर्स की जिम्मेदारी है, ऐसे में सभी को छुट्टी तो नहीं मिल सकती। ऐसे में छुट्टी नहीं मिलने के कारण घातक कदम भी नहीं उठाया जाना चाहिए। कमांडिंग अफसरों को भी बैलेंस बनाकर चलना चाहिए जिसे वास्तव में छुट्टी की जरुरत है उसे स्वीकृति देनी चाहिए।

छोड़ा जा रहा छोटे अपराध में फंसे आदिवासियों को

सरकार ने पिछले एक साल में छोटे अपराध में फंसे आदिवासियों की जेल से रिहाई का रास्ता साफ किया है। करीब 900 आदिवासियों को छोड़ने की तैयारी चल रही है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी ने आबकारी एक्ट में फंसे 300 से ज्यादा आदिवासियों को छोड़ने का फैसला किया है। वहीं छोटे-मोटे अपराध में लंबे समय से जेल में बंद 300 आदिवासियों को छोड़ने का फैसला किया गया।


छत्तीसगढ़ वर्ष घटनाएं मौत

2015 466 101

2016 395 107

2017 373 130

2018 392 153

2019 129 36

(31.05.2019 तक)