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अटल विहार योजना फूटा भ्रष्टाचार, हाउसिंग बोर्ड ने गलती भी मानी-Durg News

अटल विहार योजना फूटा भ्रष्टाचार, हाउसिंग बोर्ड ने गलती भी मानी-Durg News

छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड का एक और कारनामा सामने आया है। दुर्ग के परसदा में अटल विहार योजना प्रोजेक्ट में मकान बनाने में बड़े भ्रष्टाचार का मामला फूटा है। यहां करीब डेढ़ हजार मकान बनाए गए हैं। ये आवास तय से कम हाइट के बनाकर दिए गए हैं। ऊंचाई करीब छह इंच कम कर दी गी है। समय पर भी नहीं बनाकर दिए गए। कइयों को अब तक पजीशन नहीं मिली है। इस मामले में बोर्ड ने अपनी गलती भी स्वीकार कर ली है। 


इस मामले में छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण यानी रेरा ने एक शिकायत की जांच करवाई थी। इसमें पाया गया कि प्रोजेक्ट के सुपरविजन में लापरवाही की गई है। रेरा ने इसके लिए जिम्मेदार कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को आदेश दिया है। 


मकान की उंचाई कम होने पर इससे बचाए गए करीब 25 हजार रुपए आवेदक को देने कहा है। मकान का आधिपत्य भी अविलंब देने को कहा है। करीब 23 लाख रुपए की कीमत के ब्याज के रूप में 4 लाख 57 हजार 980 रुपए और एक लाख 27 हजार 676 रुपए सुपरविजन चार्ज के भी लौटाने का आदेश दिया है। दिलचस्प यह है कि बोर्ड ने रेरा के समक्ष स्वीकार कर लिया कि मकान की हाइट कम की गई है। मकानों का आबंटन बोर्ड ने अप्रैल 2013 में कर दिया था। तीन साल में मकान बनाकर देने का वादा खरीददारों से किया गया था। लेकिन अब तक पजेशन न मिलने पर बोर्ड से कई खरीददारों ने शिकायत की। फिर भी मकान नहीं मिला तो कुछ लोग रेरा चले गए। आवेदक रवींद्र कुमार के केस में रेरा ने उनके पक्ष में ताजा फैसला दिया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद रेरा ने जांच बैठाई। इसमें पाया गया कि तीन सालों में आवेदकों को मकान नहीं दिया। यहां तक कि दो साल अधिक बीत जाने पर भी उन्हें मकान नहीं मिला है। बोर्ड ने इस बारे में रिटेनिंग वाल की लंबाई बढ़ाने की वजह से विलंब होने की बात कही। इसमें करीब दो वर्ष आठ महीने का देरी प्रमाणित हो गई है। इसके लिए बोर्ड को ही जिम्मेदार माना गया है। इसलिए रेरा ने बोर्ड को दो साल 8 महीने का मय ब्याज भुगतान का उत्तरदायी माना है। बोर्ड की नियम शर्तों के अनुसार साढ़े सात फीसदी की दर से ब्याज की राशि आवेदक को मिलेगी। रेरा के अद्यक्ष विवेक ढांड, सदस्य नरेंद्र कुमार असवाल और राजीव कुमार टमटा ने केस की सुनवाई की। बताते हैं कि एक खरीददार को रेरा से न्याय मिलने के बाद बड़ी संख्या में इस प्रोजेक्ट में मकान लेने वाले बोर्ड के खिलाफ आवेदन लगाने वाले हैं।