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Chhattisgarh : कोयला खदान की मांग पर दो महीने बाद भी केंद्र का नहीं आया जवाब

Chhattisgarh : कोयला खदान की मांग पर दो महीने बाद भी केंद्र का नहीं आया जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के उद्योगों का कोयला संकट दूर करने के लिए केंद्र से छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) को एक कोयला खदान आवंटित करने की मांग की है। सरकार ने पांच खदानों का नाम भी सुझाया था। उद्योगों के हित में राज्य सरकार की तरफ से की गई इस मांग पर दो महीने बाद भी केंद्र सरकार का कोई जवाब नहीं आया है। शीघ्र राज्य की तरफ से स्मरण पत्र भेजने की तैयारी है।

खनिज विभाग के अफसरों ने बताया कि जिन खदानों की मांग की गई है उनका आवंटन पहले सीएमडीसी को हुआ था। इन्हें विसिकत करने में सीएमडीसी ने 625 करोड़ स्र्पये खर्च कर चुकी है। वन और पर्यावरण स्वीकृत के साथ ही भूमि अधिग्रहण भी हो चुका है। पूववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए कथित कोयला घोटाले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवंटन निरस्त कर दिया था।

अब केंद्र सरकार ने तारा, गारेपेलमा सेक्टर-1 और मदनपुर नार्थ कोल ब्लॉक्स को पॉवर सेक्टर या अन्य राज्यों (नान हॉस्ट) को आबंटन के लिए रखा है। इस वजह से सीएमडीसी आवेदन नहीं कर सका।

पांच वर्ष में 342 करोड़ का नुकसान

राज्य सरकार ने पांचों खदानों को विकसित करने पर 561 करोड़ स्र्पये खर्च किया था। 2014 में आवंटन निरस्त होने के बाद से सीएमडीसी पर प्रतिवर्ष 56.10 करोड स्र्पये का ब्याज भार बढ़ गया है। पांच वर्षों में सरकार कुल हानि 342 करोड स्र्पये ब्याज दे चुकी है।